मेरे बारे में…
Sunday, December 9th, 2007
मैं भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) के गणित विभाग में शोध छात्र हूँ. मेरा शोधकार्य वस्तुतः Partial Differential Equations एवं Computational Fluid Dynamics में है. गणित के अलावा मेरी रूचि विश्व राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम एवं खेल-कूद में है. मैं पिछले कुछ समय से पूर्णकालीन ग्नू/लिनुक्स प्रयोक्ता हूँ.
विषयवस्तु एवं प्रेरणा
पिछले कुछ समय से मैं अपने विचार दुनिया के सामने रखना चाहता था. मेरे मित्र ने मुझे blog माध्यम के बारे में परिचित कराया और मुझे यह विचार बहुत पसंद आया. उस मित्र की जिद मान कर मैंने यह blog शुरू किया है. आप यहाँ पर विश्व के ताज़ा घटनाक्रम के बारे में मेरी स्वतंत्र टिप्पणियाँ पढ़ कर अपनी सहमति या असहमतियों से मुझे अवगत करा कर मेरा ज्ञानवर्धन करें, तो मैं आपका बड़ा आभारी रहूँगा.
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[...] Vikas, a theist turned into an atheist, writes the story of his turnaround (in Hindi), and raises some genuine questions for the theists to answer, most notably, “मैं पूछता हूँ कि आख़िर इस दुनिया को बनाने का क्या कारण हैं ? क्या इसीलिए बनाया हैं कि भगवान अपनी इस रचना से खिलोनो की तरह खेलता रहे ! जिसको जब चाहा भूखा मार दिया किसी को बिना कपड़ो के ठंड से मार दिया या किसी को बमबारी करवा के मरवा दिया जैसे की छोटे बच्चे अपने खिलोनो से खेलते हैं ! कष्टों और आफतों से भरी इस दुनिया में असंख्य दुखों से ग्रसित एक भी प्राणी पूरी तरह सुखी नहीं हैं ! जब भगवान् सर्व पालनहार सर्वशक्तिमान हैं तो फिर ये स्थिति क्यों हैं ? अब दो ही बातें हो सकती हैं या तो यह सर्व पालनहार, सर्वशक्तिमान परमपर्मेश्वर वाली बात सब बकवास हैं या फिर भगवान् का कोई अस्तित्व ही नही हैं ! केवल समाज के कुछ तथाकथित श्रेष्ठ लोगो ने अपने फायदे के लिए कपोल कल्पित परिकथा की तरह भगवान् की रचना कर दी ताकि उसका डर दिखा कर अपनी मनमानी कर सके और जनता का शोषण कर सके ! आख़िर भगवान् हैं तो उसे इन महलनुमा मंदिरों मस्जिदों गिरिजाघरों की क्या जरुरत हैं ? उसकी ये कोशिश क्यों रहती हैं कि लोग उसे माने उसकी पूजा करे ? ऐसी कहानिया क्यों हैं कि जो भगवान् को नही मानता उसका विनाश हो जाता हैं ? और फिर आख़िर क्यों भगवान् के मन्दिर में ही भेदभाव क्यो होता हैं ? क्यों कुछ तथाकथित वंचित लोगो का मन्दिर में प्रवेश निषेध हैं ? क्यों वंचित पिछडे लोगो के मन्दिर अलग होते हैं? आख़िर क्यों कुछ प्रभावशाली लोगो के मन्दिर में दर्शन के लिए अलग से व्यवस्था होती हैं ? मंदिरों, मस्जिदों गिरिजाघरों के पास जो अकूत ताकत धन दौलत हैं आख़िर उसका क्या राज हैं ? मेरे विचार से अगर उसका कोई अस्तित्व हैं तो वो बहुत लाचार असहाय और बेचारा हैं जो अपने घर को भी ठीक से नही रख सकता !” [...]