दहशत में मुंबई

Posted On December 7, 2008

Filed under अंतरद्वंद

Comments Dropped 5 responses

मुंबई को दहशतगर्दो द्वारा मौत और आंतक का घिनोना खेल खेले हुए अब एक हफ्ते से भी ज्यादा समय हो गया हैं! २६ नवम्बर के बर्बरपूर्ण फिदायीन हमले के बाद मैं न्यूज़ चैनल (न्यूज़ कम नौटंकी ज्यादा) और गूगल न्यूज़ से चिपका रहा और पूरे घटनाक्रम को देखता रहा ! सबसे पहले मैं सलाम करता हूँ उन बहादुर सुरक्षाबलों को जिन्होंने अपनी जान गवांकर कई जिंदगिया महफूज की और देश को दहशत के चंगुल से मुक्त कराया ! पता नही कब हमारे मुल्क के खद्दरधारी इन जवानों के खून की कीमत समझेंगे !

जैसा की अक्सर होता हैं ऐसी आंतकी घटना के बाद मीडिया में चर्चाये होती हैं कुछ विशेषज्ञ लोग टीवी पर अपनी राय देते हैं, सियासी लीडर अपनी पॉलिटिक्स को दिशा देते हैं और कुछ दिनों के बाद ये कर्मकाण्ड ख़तम हो जाता हैं और फिर इंतज़ार होने लगता हैं अगली ऐसी ही आंतकी घटना का ! शायद ये भारत के हर आम आदमी की नियति बन गई हैं! आम आदमी की जान की यहाँ कोई कीमत नही हैं ! पता नही कब हम लोग जागेंगे ! इस सारी घटना के दौरान कलाई खुली हमारी खुफिया एजेन्सीओ की विफलता की और हमारे समुंदरी सीमा की सुरक्षा की ! इतने बड़े फिदायीन हमले की योजना बनी और हमारी खुफिया एजेन्सीओ को ख़बर तक नही ! हमारे पास रा के अलावा भी कई जांच एजेन्सीआ हैं लेकिन इनमें तालमेल का जबरदस्त अभाव हैं! सीबीआई तो यहाँ पर गद्दीनशीं लोगो द्वारा विपक्ष पर दबाव डालने वाला हतियार बन कर रह गया हैं! इस समय आतंकवाद से लड़ने के लिए जरुरत एक संघीय गुप्तचर एजेन्सी की हैं बशर्ते की वह सरकारी दखल से दूर हो ! हमें इस मामले में इजरायल की मोसाद से बहुत कुछ सीखने की जरुरत हैं!

सबसे ज्यादा नफरत मुझे यहाँ के सियासी लीडरान से हैं! जिस तरह ये नेता आंतकवाद को भी धरम के चश्मे से देख रहे हैं वो आने वाले समय में भारत के लिए बहुत खतरनाक साबित होने जा रहा हैं! ये इन नेताओ की राजनितिक दहशतगर्दी नही हैं तो और क्या हैं! मेरे विचार से महजब आदमी की व्यक्तिगत आस्था का मामला होता हैं और इसे व्यक्तिगत ही रहने दे तो ही समाज का भला हैं! धरम समाज पर लादने वाली चीज़ नही हैं! किसी को भी  किसी  धरम और जाति के ख़िलाफ़ जहर उगलने की इजाज़त नही होनी चहिये और ऐसा करने वालो को सख्त सज़ा मिलनी चाहिए! महजबी आज़ादी होनी चाहिए लेकिन उतनी नही की समाज के लिए नासूर बन जाए! सही मायनो में कोई भी धरम समाज को जोड़ने का काम करता हैं तोड़ने का नही !  ये बात मैं देश की सभी राजनितिक पार्टियों से कहना चाहता हूँ की धरम और राजनिति का ये घालमेल एक समय इस देश को बरबाद कर देगा ! पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इसका उदहारण हैं! दहशतगर्द केवल दहशतगर्द होता हैं उसका कोई धरम नही होता हैं और उससे जितनी सख्ती से निबटा जाए उतना कम हैं! मेरे ख्याल से आतंकवाद से निबटने के लिए पोटा और टाडा जैसे सख्त कानून होना चहिये लेकिन इसको लगाने का अधिकार राज्य सरकार के पास न होकर केंद्रीय सरकार के पास होना चहिये ताकि राज्य सरकारों द्वारा इसके दुरोपयोग से बचा जा सके !

एक बार फिर नेताओ के दोहरे चेहरे और शहीदों के लिए उनके मन में कितनी इज्ज़त हैं, जगजाहिर हो गई इसके बारे में बताने की जरुरत नही !  कुछ बड़बोले नेताओ और कुछ संभ्रांत वर्ग के लोगो द्वारा पाकिस्तान से युद्ध की बात हो रही हैं, कोई कह रहा हैं की मैं प्रधानमंत्री होता तो पाकिस्तान पर हमला कर देता वगरह वगरह ! क्योंकि पता हैं युद्ध में जवान का खून बहना हैं जो या तो किसी किसान मजदूर का बेटा हैं या किसी आम आदमी का ! कितने elite क्लास के लोग अपने बेटे को आर्मी में भेजना पसंद करते हैं? ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठकर बातें बनाना बहुत आसान होता हैं! बड़बोलेपन से या फिर भावनाओ के ज्वार में बहकर मौमबत्ती जलने से कुछ नही होता, काम करने से होता हैं! वैसे भी पाकिस्तान एक दम तोड़ता देश हैं और उसको अस्थिर करके अपने लिए समस्या को और बढावा देना हैं! एक स्थिर पाकिस्तान ही हमारे लिए सही हैं लेकिन आतंकी कैम्पस को ख़तम करने के लिए पाकिस्तान पर जबरदस्त दबाव बनाये रखना चाहिए! पाकिस्तान हुक्मरान पर भरोसा करना सबसे बड़ी मुर्खता हैं! पाकिस्तान सरकार कहती हैं की हमारा चरमपंथियों पर कोई कंट्रोल नही हैं और हम खुद समस्याओ से घिरे हुए हैं तो उसके लिए कौन जिम्मेदार हैं? एक बार फिर २० आंतकवादियों की सूची भारतीय सरकार द्वारा पाकिस्तान को सौपी गई हैं! जब हमारी जांच एजेन्सीओ को उनके पाकिस्तान में ठिकाने मालूम हैं तो क्यों नही हम इजरायल की तरह खुफिया आपरेशन द्वारा उन्हें वही पर ख़तम नही करा देते? क्यों हमें हर बार दुनिया के सामने सबूतों का धिन्डोरा पीटना पड़ता हैं और फिर भी होता कुछ नही ! अब हमें अपने मुल्क के बाशिंदों की हिफाजत के लिए कुछ अतिवादी कदम उठाने ही पड़ेगे बेशक वो कदम ज़ंग नही हैं, दुश्मन को जहाँ पर वो छिपा हैं वही ख़तम करना हैं! लेकिन क्या ऐसा होगा? मेरा जवाब हैं नही क्योंकि जब तक हम ऐसी सड़ी-गली राजनितिक व्यवस्था की लाश ढोते रहेंगे कुछ बदलने वाला नही ! बीबीसी के पूर्व संवाददाता सर मार्क टली के अनुसार भारत एक विशालकाय समुद्री जहाज जैसा है जो हिलता डुलता हुआ पानी को चीरता चलता है और ऐसे आंधी तूफ़ान में भी डूबता नहीं जिसमें छोटी नौकाएं या अस्थायी जहाज़ डूब जाते हैं! लेकिन इस देश के सियासतदान कही एक दिन इसे डूबा ना दे !

5 Responses to “ दहशत में मुंबई ”

  1. सुरेश चिपलूनकर

    हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, खूब लिखें और नाम कमायें यही शुभकामनायें हैं…

  2. Rachana Gaur Bharti

    आपने बहुत अच्छा लिखा है ।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    http://www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    http://www.chitrasansar.blogspot.com

  3. Prakash Govind

    सही मुद्दा उठाया आपने !
    तर्क संगत बात कही आपने ! अच्छा लिखा है आपने !
    आपका लेखन चिंतन करने को बाध्य करता है !

    हमें यह नही भूलना चाहिए कि जब हमारा स्वयं का घर कमजोर हो तभी बाहर वाले का हौसला बढ़ता है ! इतिहास की बातों को याद करने से कोई फायदा नहीं किंतु उनसे हम सबक अवश्य ले सकते हैं ! लोकतंत्र में काले धन का समावेश ,,,,,, वोटों की टुच्ची राजनीति ,,,,,,,, जातिवाद – क्षेत्रवाद की घ्रणित मानसिकता …… भीतर तक पसरा भ्रष्टाचार इत्यादि ने आज देश की ऐसी दुर्गति की है ! एक बार हमारा घर – हमारा सिस्टम सही हो जाए तो फिर क्या मजाल कि कोई बाहर वाला हमें आँख दिखा कर चला जाए !

    मेरी शुभकामनाएं !!!

    कभी समय हो तो मेरे ब्लॉग पर भी दस्तक दीजिये !

  4. hindustani

    chintan ke liye hai aapke shabd

    हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
    टेम्पलेट अच्छा चुना है

    कृपया मेरा भी ब्लाग देखे और टिप्पणी दे
    http://www.ucohindi.co.nr

  5. sangita puri

    आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Respond now.